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Friday, September 1, 2017

जज्बात शायरी by Jot Chahal

September 01, 2017
1. हर रोज निकलता हूँ साथ लेकर जज्बातों का कारवाँ, मिल जाए मंजिल  मुझे न जाने वो सहर क्यों नहीं होती। 2. न मिलने की ये मजबूरियाँ बना कर रखो, ...