जज्बात शायरी by Jot Chahal Jot Chahal September 01, 20171. हर रोज निकलता हूँ साथ लेकर जज्बातों का कारवाँ, मिल जाए मंजिल मुझे न जाने वो सहर क्यों नहीं होती। 2. न मिलने की ये मजबूरियाँ बना कर रखो, ... Continue Reading